गिरडीह, सितम्बर 7 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। मधुबन स्थित गुणायतन में आयोजित सोलह कारण पर्व पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि जीवन का लक्ष्य केवल धर्म करना नहीं, बल्कि धर्म की आराधना के माध्यम से स्वयं को परिवर्तित करना होना चाहिए। प्रभु आराधना के साथ आत्म आराधना का क्रम भी चलता रहे, तभी धर्म जीवन को सार्थक दिशा दे सकता है। मुनि श्री ने कहा कि मंदिर जाकर पूजा-पाठ कर लेना मात्र धर्म नहीं है। धर्म की सच्ची आराधना तब है, जब उसके सिद्धांत हमारे व्यवहार, आचरण, विचार और भावनाओं में दिखाई देने लगें। जब धर्म जीवन में उतरता है, तभी वास्तविक परिवर्तन घटित होता है।

धर्म का व्यवहार में उतारना उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के भीतर धर्म कितना उतरा है, इसकी पहचान उसकी धार्मिक क्रियाओं की संख्या से नहीं, बल्कि उस...