लखनऊ, अप्रैल 10 -- भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह में शुक्रवार को बीएम शाह प्रेक्षागृह में मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और संघर्ष की एक विराट प्रस्तुति देखने को मिली। गोरखपुर की संस्था सांस्कृतिक संगम की ओर से मंचित इस नाटक ने दर्शकों को न केवल पौराणिक काल की स्मृतियों में डुबोया बल्कि वर्तमान समाज के लिए कई प्रासंगिक प्रश्न भी खड़े किए। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की सुप्रसिद्ध रचना पर आधारित यह मंचन एक ऐसे उपेक्षित नायक कर्ण की कहानी है, जिसने जन्म से लेकर मृत्यु तक केवल सामाजिक विषमता और संघर्ष का सामना किया।नाटक में गुरु-शिष्य परंपरा, अविवाहित मातृत्व की सामाजिक चुनौती और धर्म-अधर्म के बीच फंसे एक दानवीर के अंतर्द्वंद को बहुत ही मार्मिक ढंग से उकेरा गया है। लेखक ने पात्र के सामाजिक और पारिवारिक सम्बन्धों को नये सिरे...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.