धर्मेंद्र का ये गाना माना जाता है हिंदी सिनेमा का अभिशाप, आपने सुनीं टूटे दिल की ऐसी बद्दुआ?
नई दिल्ली, मई 22 -- हिंदी सिनेमा में गाने भावनाओं के इजहार का सबसे बड़ा जरिया होते हैं। प्यार जताना हो या टूटे दिल का दर्द सुनाना हो, गीतकारों ने हर मिजाज के गाने लिख रखे हैं। वहीं गुजरे जमाने में एक ऐसा गाना आया जिसे लोग बद्दुआ के तौर पर देखते हैं। हम बात कर रहे हैं, आये दिन बहार के उस गाने की जिसे आनंद बक्शी ने लिखा था। यह गाना है मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे। इस गाने की एक-एक लाइन ध्यान से सुनेंगे तो समझ आएगा कि गाने वाले के दिल में कितनी नफरत भरी है।हिंदी सिनेमा का बद्दुआ गीत तू फूल बने पतझड़ का, तुझपे बहार ना आए कभी... सोचिए ये बद्दुआ देने वाले के मन में कितना दर्द होगा। 1966 में आई फिल्म आए दिन बहार के का ये गाना अभिशाप गीत के तौर पर लिया जाता है। गाना आशा पारेख और धर्मेंद्र पर फिल्माया गया है। मूवी के डायरेक्टर रघुनाथ झलानी थ...
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