वाराणसी, मार्च 27 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नि:संदेह गंगा, यमुना और गुप्त सरस्वती का संगम प्रयागराज में है लेकिन काशी की धरती भी गुरुवार की रात एक संगम की साक्षी बनी। दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ परिसर में गायन की गंगा, वादन की यमुना और नृत्य की प्रत्यक्ष सरस्वती का मिलन हुआ। अवसर था श्रीराम नवमी के उपलक्ष्य में पहली बार आयोजित काशी संगीत कला महोत्सव की प्रथम निशा का। शास्त्रीय संगीत में बनारस घराने की समृद्धशाली परंपरा को समर्पित इस सांगीतिक अनुष्ठान के आरंभ में पहले शास्त्र की मान्यता को नमन करते हुए वैदिक और फिर शहनाई की मंगलध्वनि से सांगीतिक मंगलाचरण उप्र प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित पं.जवाहरलाल और साथियों ने की। पं.जवाहरलाल ने राग यमन में तीनताल में निबद्ध बंदिश सुनाई। इसके बाद चैती की मन मोहक धुन सुनाई। उनके साथ तबल...