धरती पुत्रों की व्यथा: मक्के की खेती में बगैर बाजार के अपना भविष्य तलाश रहे किसान
किशनगंज, अप्रैल 16 -- टेढ़ागाछ। टेढ़ागाछ प्रखंड में कृषि ही आजीविका का मुख्य आधार है। इस वर्ष क्षेत्र के किसानों ने अधिक मुनाफे की आस में बड़ी उम्मीदों के साथ मक्के की खेती की थी, लेकिन आज उनकी उम्मीदें बाजार की अनिश्चितता और मौसम की बेरुखी की भेंट चढ़ती नजर आ रही हैं। डाकपोखर पंचायत स्थित हरहरिया गांव के स्थानीय किसान बसंत सिन्हा बताते हैं कि एक एकड़ मक्के की खेती में बीज, जुताई, पटवन और खाद मिलाकर लगभग 30 हजार रुपये का खर्च आता है। मक्के की फसल तैयार होने में 5 से 6 महीने का समय लगता है। वर्तमान में बाजार में मक्के का भाव लगभग 1900 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बना हुआ है। यह भी पढ़ें- धरती पुत्रों की व्यथा: अब सीवान जिले के किसानों के लिए फायदे का सौदा नहीं रही सरसों की खेती इस भाव पर बेचने से किसानों को केवल उनकी लागत पूंजी ही वापस मिल पा र...
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