पूर्णिया, अप्रैल 19 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया जिला मखाना उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखता है। यहां के तालाबों और जलाशयों में उगने वाला मखाना न केवल किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है, बल्कि इसे सफेद सोना भी कहा जाता है। बावजूद इसके, मखाना किसानों की हालत आज भी संतोषजनक नहीं है। बढ़ती लागत, सिंचाई की समस्या, श्रमिकों की कमी और बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। मखाना की खेती सामान्य फसलों की तरह नहीं होती। इसके लिए तालाब, जलभराव क्षेत्र या विशेष रूप से तैयार खेत की जरूरत होती है। एक एकड़ में मखाना की खेती करने में औसतन 1.2 लाख से 1.8 लाख रुपये तक की लागत आती है। यह भी पढ़ें- बाजार नहीं रहने से मखाना गुड़िया का नहीं मिलता सही मूल्य इसमें बीज, मजदूरी, तालाब की सफाई, जल प्रबंधन, खाद, कीटनाशक और कटाई क...