धन या ऐश्वर्य नहीं भगवान को चाहिए प्रेम
पीलीभीत, अप्रैल 18 -- पीलीभीत। शेरों वाली मठिया के पास ब्रह्मदेव मंदिर प्रांगण में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन विदुर और विदुरानी की कथा का प्रसंग सुनाया गया। व्यास ठाकुर जी महाराज ने बताया की विदुर और विदुरानी (विदुरा) की कथा महाभारत में श्री कृष्ण के प्रति निश्चल भक्ति का प्रतीक है। दुर्योधन के अपमान के बाद, जब भगवान कृष्ण शांतिदूत बनकर हस्तिनापुर आए, तो दुर्योधन के छप्पन भोग को ठुकराकर उन्होंने अपने परम भक्त विदुर के घर केले खाए। विदुरानी ने प्रेम में आकर केले का छिलका खिलाया, जिसे भगवान ने खुशी-खुशी स्वीकार किया। विदुर और उनकी पत्नी विदुरा हस्तिनापुर में अपनी कुटिया में भगवान कृष्ण का चिंतन करते थे। यह भी पढ़ें- भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया दुर्योधन के अत्याचारों के कारण वे राजमहल से दूर रहते थे। प्रभु श्रीकृष्ण जब विदुर ...
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