बागपत, अगस्त 23 -- बड़ौत। दिगंबर जैनाचार्य आर्जवसागर गुरुदेव ने अजितनाथ सभागार में मंगल प्रवचन करते हुए कहा कि चातुर्मास धन कमाने का नहीं, बल्कि धर्म कमाने का समय है। यह धर्म की वर्षा का अवसर है, जिसमें भींगकर जीवनोपयोगी बातों को आत्मसात करना चाहिए। परिग्रह मनुष्य के जीवन पर एक भार है। परमात्म पद की ओर बढ़ने के लिए इस भार से मुक्त होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए इसका सदुपयोग धर्म, तप, त्याग और आत्मचिंतन में करना चाहिए। इस अवसर पर मुकेश जैन, महेंद्र जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, वकील चंद जैन, अनिल जैन, अंकुर जैन, विकास जैन, अनुज जैन, ऋषभ जैन आदि उपस्थित रहे।

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