मधुबनी, अप्रैल 29 -- कन्हैयाजी ठाकुर झंझारपुर। जहां एक ओर गांव के युवा रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं काको पंचायत के दाता मुखिया ने गांव की मिट्टी में ही अपनी किस्मत लिखने का हौसला दिखाया है। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने जो रास्ता चुना, आज वह न सिर्फ उनकी पहचान बन चुका है, बल्कि इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन रहा है।12वीं की पढ़ाई के बाद घर की आर्थिक स्थिति ने दाता मुखिया को कमाने के लिए मजबूर किया। बाहर नौकरी की बजाय उन्होंने गांव में ही कुछ नया करने का निश्चय किया। लीज पर धनहर खेत लेकर उन्होंने एक अनोखा प्रयोग शुरू किया-एक ही खेत में मखाना, सिंघाड़ा और मछली पालन का समन्वित उत्पादन। खेत के चारों ओर मेड़ बनाकर करीब तीन फीट पानी जमा किया गया। कृषि कनेक्शन से पंपसेट लगाकर पानी की निरंत...