रांची, जुलाई 29 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि पिता अपने नाबालिग बेटे को अपने साथ ले जाता है तो मात्र इस आधार पर उसके खिलाफ अपहरण का मामला नहीं बनता। पिता बच्चे का प्राकृतिक संरक्षक होता है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल सामान्य रूप से मारपीट का आरोप लगा देने से कोई मामला भी नहीं बनता। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने धनबाद के शिकायत वाद में चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही और न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत ने यह आदेश हजारीबाग निवासी खालिद इकबाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। यह भी पढ़ें- तलाक के लिए केवल लंबे समय से अलग रहना पर्याप्त आधार नहीं: हाईकोर्ट प्रार्थी ने धनबाद के न्यायिक दंडाधिकारी के 12 जून 2024 को शिकायतवाद में ...