मैनपुरी, नवम्बर 20 -- सहालग का सीजन इन दिनों खूब चल रहा है। दावतों का दौर है। ऐसे में लजीज पकवानों की चर्चा होती है तो हर जुबान पर एक ही सवाल आता है कि मटर पनीर मत खाना। पनीर मिलावटी हो सकता है। अब सवाल यह भी है कि शहर में दूध के उत्पादन की तुलना में पनीर की बिक्री अधिक है तो यह पनीर दूध के बिना बन कैसे रहा है। और मिलावट हो रही है तो खाद्य विभाग क्या कर रहा है। शहर हो या गांव या फिर कस्बा। मिलावटी पनीर की बिक्री खुलेआम की जा रही है। मैनपुरी में मिलावटखोरों की सक्रियता इस बात को साबित करती है कि खाद्य विभाग अपनी जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभा रहा। यही वजह है कि सहालग का सीजन हो या फिर आम दिनों की बात। पनीर खरीदने के लिए सोचना पड़ता है कि आखिर किस दुकान पर जाएं और कहां से बिना मिलावट का पनीर लें। पनीर का सेवन स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है ...
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