सहरसा, फरवरी 27 -- कहरा, एक संवाददाता। देवना स्थित द्वापर कालीन वानेश्वर नाथ स्थान आज भी राज्य सरकार द्वारा पर्यटन एवं पुरातात्विक स्थल के रूप में मान्यता और समुचित विकास से अछूता बना हुआ है। क्षेत्रीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के बीच अब इस ऐतिहासिक धरोहर को आधिकारिक पहचान दिलाने की मांग तेज होती जा रही है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में प्रह्लाद के प्रपौत्र वाणासुर का इस क्षेत्र में साम्राज्य था। कहा जाता है कि वाणासुर ने भगवान शंकर की तपस्या कर वर प्राप्त किया और इसी स्थल पर शिवलिंग की स्थापना की। सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध इस स्थान पर वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विशेषकर सावन माह के प्रत्येक सोमवार को लाखों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थल ऐतिहासिक दृ...