जमशेदपुर, मार्च 15 -- शिव महापुराण में द्वादश ज्योतिर्लिंग का वर्णन अत्यंत पावन और कल्याणकारी है, जो शिव के ज्योति स्वरूप का प्रतिपादन हैं। ज्ञान संहिता में शिवजी ने स्वयं इन बारह स्थानों को अपने प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्वरूप बताया है, जहां दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह कथा भक्तों को शिव के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति का संदेश देती है। ये बातें बिष्टूपुर सत्यनारायण श्याम मारवाड़ी मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन शनिवार को कथावाचक स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने जालंधर वध, द्वादश ज्योतिर्लिग वर्णन कथा का प्रसंग सुनाते हुए कही। कथावाचक ने कहा कि 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम का सुबह-शाम स्मरण करने मात्र से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह प्रसंग शिव के कल्याणकारी, ज्ञानप्रद और...