वाराणसी, मार्च 23 -- अरविन्द मिश्र वाराणसी। शक्ति के गौरी स्वरूप की आराधना को समर्पित वासंतिक नवरात्र देवी का घर-घर पूजन होता है। अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व है। इन दोनों तिथियों पर भक्तगण अपने-अपने परिवार की परंपरा और मान्यता के अनुरूप कन्या पूजन करते हैं। हमारे शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि दो से 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन करना चाहिए। प्रत्येक वय की कन्या देवी के स्वरूप विशेष का प्रतिनिधित्व करती है।काशी के ज्योतिषाचार्य पं.विकास शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में कन्या पूजा को अत्यंत शुभ और विशिष्ट फलदायी माना गया है। कन्या पूजन से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनके चरण धोकर आसन दिया जाता है। तिलक करके भोग अर्पित किया जाता है। अंत में दक्षिण एवं अन्य उपहार भेंट कर उनकी विदाई की जाती है। दो से कम और 10 वर्ष स...