कानपुर, नवम्बर 22 -- कानपुर देहात, संवाददाता। असालतगंज के जंगल में डेरा जमाए दुर्लभ प्रजाति के काले व चित्तीदार हिरणों के संरक्षण का इंतजाम कागजों में सीमित है। सुरक्षा की अनदेखी से यह दुर्लभ हिरण कुत्तों के हमले के साथ का बेलगाम शिकारियो का भी निशाना बन रहे हैं, इससे दुर्लभ प्रजाति के इन हिरणों के अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। इनके संरक्षण के लिए शासन को भेजे गए 1.37 करोड़ की कार्ययोजना को दो साल बाद भी शासन की हरी झंडी मिलने का इंतजार है। रसूलाबाद तहसील क्षेत्र के असलतगंज का यह जंगल बिल्हौर - रसूलाबाद मार्ग के समानांतर 6 किमी लंबाई में 173 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है।इस वन की 80 हेक्टेयर भूमि में विलायती बबूल खड़े है। जंगल में दुर्लभ काले व चित्तीदार 250 हिरणों का कुनबा डेरा जमाए हुए है। इन हिरणों को नर्म घास अधिक पसंद होती है,लेकिन जंग...
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