पीलीभीत, अगस्त 12 -- पीलीभीत। हाईकोर्ट इलाहाबाद ने अधिवक्ताओं के सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के बाद दो वर्ष के भीतर ऑल इंडिया बार एग्जाम (एआईबीई) पास कर सीओपी हासिल करना जरूरी होगा। सीओपी के बिना अधिवक्ता को विधि व्यवसाय करने का अधिकार नहीं होगा। ऑल इंडिया बार काउंसिल के नियमों के अनुसार वर्ष 2010 से उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में विधि व्यवसाय के लिए पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ताओं को दो वर्ष के भीतर एआईबीई पास करना अनिवार्य है। परीक्षा पास करने के बाद ही उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से सीओपी जारी किया जाता है। सीओपी मिलने के बाद ही अधिवक्ता को विधि व्यवसाय करने की अनुमति होती है। सीओपी नहीं होने पर अधिवक्ता का नाम उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की मतदाता सूची में भी शामिल नहीं किय...