बदायूं, अगस्त 20 -- जिस मां की गोद दो साल के विनोद के लिए पूरी दुनिया थी, हादसे ने वही गोद हमेशा के लिए छीन ली। जिला अस्पताल में मां की मौत से अनजान विनोद उन्हें पुकारता रहा। कभी दरवाजे की ओर देखता, कभी किसी महिला को मां समझकर पास जाता। वहीं दस साल का सिमोन भी मां की मौत से बेखबर था। वह मां के साथ चंडीगढ़ पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठा था। दोनों मासूमों को क्या पता, जिस मां की राह वे देख रहे हैं, वह अब कभी नहीं आएगी। नेमबहादुर खत्री चंडीगढ़ में कार धुलाई का काम करते हैं। उनकी पत्नी दीपना खात्री कुछ दिन पहले अपने दो साल के बेटे विनोद के साथ किसी काम से नेपाल गई थीं। रात में वह बेटे को लेकर पति के पास चंडीगढ़ लौट रही थीं, लेकिन गंगा एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में उनकी मौत हो गई। जिला अस्पताल में मौजूद विनोद को मां की मौत के बारे में कुछ पता नही...