नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- एस श्रीनिवासन, वरिष्ठ पत्रकार तमिलनाडु विधानसभा का 23 अप्रैल को होने वाला मतदान रोमांचक चरण में प्रवेश कर रहा है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच टीवीके रूपी एक तीसरा पहलवान आ गया है, जो दोनों द्रविड़ पहलवानों के चुनावी रथ को डगमग कर रहा है। वर्तमान स्थिति को समझने के लिए अतीत में देखना होगा। साल 1967 और 1977 में तमिलनाडु की चुनावी राजनीति उलट-पुलट हो गई और 2006 में भी ऐसी ही स्थिति पैदा हुई, जब पारंपरिक दो-ध्रुवीय लड़ाई तीसरे प्रतिद्वंद्वी के प्रवेश से खतरे में पड़ गई थी। आजादी के बाद से राज्य पर शासन करने वाली कांग्रेस सरकार 1967 में द्रमुक से हार गई और तब से कभी भी सत्ता में नहीं लौटी। उस समय द्रविड़ विचारधारा को राज्य की राजनीति का आधार बनाने वाले करिश्माई नेता सीएन अन्नादुरई ने मुख्यमंत्र...