सुल्तानपुर, मार्च 7 -- बल्दीराय, सुलतानपुर। जीवन में दो अक्षरों के नाम का जाप करने से मनुष्य को भवसागर से मुक्ति मिलती है। मनुष्य मृत्यु के समय जिस विषय का चिंतन करता है।अगले जन्म में उसे उसी योनि की प्राप्ति होती है। संतों का मिलना भी भगवान की कृपा से ही संभव होता है और हर किसी के मुख से परमात्मा का नाम निकलना भी ईश्वर की विशेष कृपा का परिणाम है।यह बातें कथा व्यास पंडित ज्ञानेंद्र तिवारी ने बल्दीराय बाजार स्थित रामलीला मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कही ।तृतीय दिवस की कथा में कथा व्यास ने बालक ध्रुव, भक्त प्रह्लाद और भक्त अजामिल की कथा का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर के नाम का स्मरण ही मनुष्य के लिए मोक्ष का सबसे सरल साधन है। इस संसार में जो व्यक्ति माता-पिता, गुरु और सास-ससुर की सेवा करता है, वह क...