नई दिल्ली, मार्च 6 -- नई दिल्ली। देश की अदालतों में करीब 5 करोड़ मामले लंबित होने के कारण और न्याय व्यवस्था में संरचनात्मक कमियों के चलते न्यायिक विलंब में महत्वपूर्ण योगदान होने की आशंका जताई जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों की दलील है कि जब तक गलत दस्तावेज पेश करने वालों पर सख्ती नहीं होगी, तब तक अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम नहीं होगी। दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया, जहां वक्ताओं ने प्रस्तावित 'सतयुग बिल' को पेश करने की पुरजोर वकालत की।प्रस्तावित कानून शपथ पर दिए गए बयान की पवित्रता को बहाल करने और न्यायिक प्रणाली को जानबूझकर गुमराह करने वालों के लिए कठोर दंड सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक नियुक्तियों में वृद्धि औ...