महोबा, अगस्त 12 -- कुलपहाड़,संवाददाता। देश की आजादी के लिए वीर भूमि में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सुलगी चिंगारी से कुलपहाड़ में अनोखा आंदोलन हुआ। एक माह तक लोगों ने अंग्रेजों के समर्थकों का समाजिक बहिष्कार किया। आजादी के आंदोलन को लेकर कुलपहाड़ में बैठकें होती थी। 1921 में भगवान दास बालेंदु के नेतृत्व में विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर आंदोलन की शुरूआत की गई थी। बाद में अंग्रेजों के समर्थकों का बहिष्कार कर अनूठे शांति संग्राम की शुरुआत हुई। रेल सुविधा होने के कारण कुलपहाड़ आजादी के आंदोलन में कूदे क्रांतिकारियों का कुलपहाड़ आना होता था। यह भी पढ़ें- जंग-ए-आजादी में कूदे, शिक्षा की अलख जगा बन गए बुंदेलखंड के मालवीयक्रांतिकारियों का योगदान बालेन्दु अरजरिया, बालगोविंद्र अग्रवाल, मूलचंद्र,अब्दुल रज्जाक आदि महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आं...