प्रयागराज, सितम्बर 11 -- ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में शुक्रवार को जनजातीय अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। 'देशज ज्ञान परंपराओं का पुनरुद्धार: भारत में जनजातीय विरासत, सांस्कृतिक निरंतरता एवं सामाजिक रूपांतरण' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने विचार रखे। मुख्य अतिथि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि देशज ज्ञान परंपराओं के साथ लंबे समय तक हाशिए का व्यवहार हुआ। इन परंपराओं को शिक्षा, समाज और दुनिया की समस्याओं के समाधान में उपयोग करने की जरूरत है। समकालीन अकादमिक विमर्श में देशज ज्ञान परंपराओं पर नए दृष्टिकोण, शोध और अध्ययन जरूरी हैं। संस्कृति विकासशील है और अपनी जड़ों को बनाए रखकर ही संरक्षित रह सकती है।

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