सहारनपुर, मार्च 24 -- सरसावा। नवरात्र के पांचवे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने बड़े श्रद्धाभाव के स्कंदमाता की पूजा की। पंडितजी ने कहा कि हिमायल की पुत्री पार्वती हैं, इन्हें गौरी भी कहा जाता है। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। जो कि देव-असुर संग्राम में देवताओं के सेनापति थे। इनकी माता होने से इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। अंबाला रोड स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में माता रानी का गुणगान करते हुए श्री बनखंडी महादेव मंदिर की पुजारी पंडित अनिल कौशिक ने कहा कि नवरात्रि की पंचमी तिथि को स्कंदमाता की पूजा विशेष फलदायी होती है। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होना चाहिए। जिससे ध्यान की शक्ति बढ़ती है। ये शक्ति परम शांति और सुख का अनुभव कराती है। इन देवी की कृपा से बुद्धि बढ़ती है। ज्ञान रूपी आशीर्वाद मिलता है। इनकी पूजा से हर तरह...