देहरादून, जनवरी 20 -- देहरादून। किशनपुर स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर में देवी भागवत कथा में कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने धर्म-अधर्म की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वेदव्यास द्वारा रचित भागवत मोक्षपरक है, जबकि देवी भागवत कर्म सिद्धि का मार्ग बताता है। आचार्य ममगांई ने बताया कि जो ईश्वर की आज्ञा से विमुख होकर पक्षपात, अन्याय, अहंकार और क्रूरता से युक्त आचरण करता है, वही अधर्म कहलाता है। धर्म का वास्तविक स्वरूप सार्वभौमिक होता है। जो मत या मजहब मनुष्यों में भेदभाव सिखाए, वह धर्म का स्थान नहीं ले सकता। कथा में पूर्व पार्षद उर्मिला थापा, अशोक थापा, शिवेंद्र भंडारी, भूपेंद्र सिंह नेगी, कुसुम नेगी, अनुभव नेगी, विजय पाल सिंह रावत, नीतू रावत, राजेंद्र बंगवाल, माला बंगवाल, राघव गोयल, संजीव गुसाईं आदि मौजूद रहे।
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