वाराणसी, अप्रैल 4 -- वाराणसी। स्त्री का अपमान करने से बड़ा पाप लगता है। इस पाप का प्रायश्चित भगवान को भी करना पड़ता है। भगवान विष्णु इसके सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। ये बातें साध्वी गीताम्बा तीर्थ ने कहीं। वह डाफी स्थित आशीर्वाद वाटिका में श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को प्रवचन कर रही थीं। उन्होंने पौराणिक प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि पापी जालंधर का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने उसकी प्रतिव्रता पत्नी वृंदा के सतीत्व का नाश किया। भगवान विष्णु ने जालंधर के रूप में वृंदा के साथ शयन किया। जब यह बात वृंदा को पता चली तो उन्होंने कहा कि जिस तरह आपने मेरे पास आकर 14 दिन अपने को मेरे पति जालंधर के रूप में सिद्ध करने में लगाए, मैं आपको श्राप देती हूं कि आपको 14 वर्ष का वनवास मिलेगा। छह महीने मेरे साथ रहे हैं तो आपकी भी पत्नी को छह...