बदायूं, अप्रैल 10 -- गांव रिसौली में आयोजित मेरे राम कथा महोत्सव के पांचवें दिन कथावाचक संत रवि जी समदर्शी महाराज ने राम जन्म से ताड़िका वध तक के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि देवताओं के कष्ट दूर करने हेतु भगवान विष्णु ने राजा दशरथ के यहां अवतार लिया। माता कौशल्या के आग्रह पर प्रभु ने चतुर्भुज रूप त्यागकर मनमोहक बाल रूप धारण किया। कथा में बताया गया कि श्रीराम ने अल्पकाल में ही गुरु आश्रम से समस्त विद्याएं सीखीं। आगे महर्षि विश्वामित्र के साथ जाकर उन्होंने ताड़िका का वध किया और राक्षसों से यज्ञ की रक्षा की। इस अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम पाली सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर प्रसाद ग्रहण किया।
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