नई दिल्ली, फरवरी 6 -- झारखंड का देवघर बैद्यनाथ धाम भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसे मनोकामना लिंग भी कहा जाता है, क्योंकि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। महाशिवरात्रि के दिन यहां लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। मंदिर का नजारा अलग ही होता है और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठता है। बैद्यनाथ धाम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कई अनोखी परंपराएं हैं, जो अन्य शिव मंदिरों में नहीं देखी जाती है। महाशिवरात्रि पर यहां मोर मुकूट और गठबंधन परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। आइए जानते हैं इन परंपराओं और उनके महत्व के बारे में। बैद्यनाथ धाम का धार्मिक महत्व देवघर को देवों की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां की मिट्टी और हवा में भगवान शिव और माता पार्वती का वास है। बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को मनोकामना लिंग क...
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