देवउठनी एकादशी पर भद्रा का साया, जानें क्या बदलेंगे पूजा के नियम?
नई दिल्ली, अक्टूबर 27 -- देवउठनी एकादशी जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस पावन दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने की लंबी योग निद्रा से जाग्रत होते हैं और पुन: सृष्टि के संचालन का कार्यभार संभालते हैं। इस दिन ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस बार देवउठनी एकादशी पर भद्रा का साया रहने वाला है। भद्रा का वास इस दिन पृथ्वी लोक पर रहने वाला है। वैदिक ज्योतिष में भद्रा को अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए कार्यों का उत्तम फल प्राप्त नहीं होता है, इसलिए इस समय पूजा-पाठ या अन्य किसी भी मंगल कार्य को करने से बचना चाहिए। देवउठनी एकादशी के दिन लोग शाम के समय भगवान श्रीहरि की पूजा करते हैं और उन्हें मंगल-गीत गाकर जगाते हैं। कुछ जगहों पर इस दिन तुलसी विवाह की भी परं...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.