औरंगाबाद, दिसम्बर 28 -- कुटुंबा प्रखंड में इस वर्ष गेहूं की बुवाई निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। सामान्यतः 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच गेहूं की बुवाई पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन इस वर्ष केवल कुछ ही खेतों में समय पर बुवाई हो सकी। अधिकांश खेतों में 15 दिसंबर के बाद गेहूं बोया गया और कई स्थानों पर अब भी बुवाई जारी है, जबकि जनवरी माह नजदीक है। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप चौबे के अनुसार, देर से बुवाई का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। एक दिसंबर के बाद बोए गए गेहूं में प्रतिदिन प्रति बीघा लगभग 10 किलो तक उपज घट सकती है। इस आधार पर अभी बोए जा रहे गेहूं में प्रति बीघा करीब तीन कुंतल तक उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है, जो किसानों के लिए गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। किसानों का कहना है कि...
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