प्रयागराज, अप्रैल 13 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि देरी के आधार पर कृषक दुर्घटना योजना के तहत दावा खारिज करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि देरी के कारणों पर विचार करना आवश्यक है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि भले ही योजना में दावा दाखिल करने की अधिकतम समय सीमा 75 दिन निर्धारित हो, लेकिन यदि देरी के पीछे उचित कारण हों तो अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे उन कारणों पर विचार करें। कोर्ट ने कहा, 'यदि देरी के कारणों पर विचार ही नहीं किया जाता तो यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। हर आवेदक को यह अधिकार है कि उसे अपनी देरी का स्पष्टीकरण देने का अवसर मिले।' मामला उन याचिकाओं से जुड़ा था, जिनमें किसानों के परिजनों के दावे सिर्फ इस आधार पर खारिज कर दिए...