देहरादून, जुलाई 2 -- देहरादून। बुलंद इरादों और हौसलों के आगे शारीरिक बाधाएं कभी रुकावट नहीं बनतीं। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है महज पांच साल के दृष्टि दिव्यांग बालक श्रेयांश ने। नन्हीं उम्र में ही उसने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो बड़े-बड़ों के लिए प्रेरणा है। हाल ही में डलहौजी भ्रमण के दौरान श्रेयांश ने सहायक के साथ पैराग्लाइडिंग कर इतिहास रच दिया। वह इस साहसिक खेल को अंजाम देने वाला देश का सबसे कम उम्र का दृष्टि दिव्यांग बालक बन गया है। श्रेयांश जन्म से ही दृष्टि दिव्यांग है, लेकिन उसने बचपन से ही अपनी इस कमी को चुनौती मानकर उसे 'अंगूठा' दिखा दिया है। वह चतुर बुद्धि और स्फूर्ति का धनी है। उसके माता-पिता, जो स्वयं भी दृष्टि दिव्यांग हैं और क्रमशः यूनियन बैंक व एसबीआई में कार्यरत हैं, उसे सकारात्मक दिशा दे रहे हैं। श्रेयांश ने आदर्श विद्...