कन्नौज, जनवरी 24 -- तालग्राम, संवाददाता। तालग्राम देहात क्षेत्र के कुशलपुरवा गांव में ग्राम समाज के सहयोग से ब्रह्मदेव स्थल पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य प्रदीप सुंदर महाराज ने श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित की प्रेरणादायी कथा का रसपान कराया। कथा का शुभारंभ महाराज परीक्षित के जन्म प्रसंग से हुआ। कथावाचक ने बताया कि राजा परीक्षित अर्जुन के पौत्र एवं अभिमन्यु के पुत्र थे। महाभारत युद्ध के पश्चात अश्वत्थामा द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र से भगवान श्रीकृष्ण ने गर्भ में ही उनकी रक्षा की थी। इसी कारण उनका नाम 'परीक्षित' पड़ा, क्योंकि वे जन्म से ही भगवान के दर्शन की खोज में रहते थे। कथावाचक ने आगे बताया कि एक बार शिकार के दौरान राजा परीक्षित को अत्यधिक प्यास लगी। जल की खोज में वे ऋषि शमीक के आश्रम पहुंचे, जहां ऋषि ध्यानमग्न ...