मुजफ्फरपुर, जनवरी 10 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। जो मनुष्य किसी दूसरे के हृदय को दुखी कर मंदिर में भगवान को छप्पन भोग लगाते हैं, उनकी पूजा विफल हो जाती है। जैसे राख में किया हुआ हवन निष्फल होता है। ये बातें शनिवार को श्री दुर्गा स्थान मंदिर गोला रोड में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन ब्यास पीठ से बाल संत पीयूष गिरि ने कही। उन्होंने कहा कि कपिल मुनि ने अपनी ही माता को विरक्त होने का उपदेश देते हुए समझाया कि जब तक परमात्मा की उपलब्धि सभी जीवों में नहीं होती, तब तक उसकी साधना की चरम अवस्था की प्राप्ति नहीं होती। उन्होंने जीव के गर्भवास का वर्णन किया। छोटे से बालक ध्रुव की तपस्या और वरदान में ध्रुव लोक की प्राप्ति की कथा विस्तार से सुनाई। कथा में जड़भरत उपाख्यान, रहुगण संवाद, जंबू दीपक वर्णन, शिव दक्ष प्रकरण का भी वर्णन किया ग...
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