आजमगढ़, मार्च 3 -- आजमगढ़,संवाददाता। रमजान का पहला अशरा गुजर चुका है। दूसरा अशरा एक फरवरी से शुरू हो चुका है। दूसरा असरा ये वो बाबरकत दिन है। जिनमें अल्लाह ताला अपने बंदों की तौबा कबूल फरमाता है और इनके गुनाहों की बकसिश के दरवाजे खोल देता है। ये महीना गुनाहों से पाक होने और सच्चे दिल से तौबा करने का बेहतरीन मौका देता है। जामा मस्जिद अतरौलिया के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद अब्दुल बारी नईमी आजमी ने कहा कि सभी को चाहिए कि वह रमजान के दूसरे अशरे में कसरत के साथ कुरआन की तिलावत करें और अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगें। उन्होंने बताया कि इंसान खताओं का पुतला है। उससे गलतियां होती हैं। अल्लाह ताला बंदों को गलतियों से तोबा करने का मौका देता है और उनकी मगफिरत फरमाता है। दूसरे अशरे में सच्चे दिल से की गई तौबा कुबूल होती है और गुनाहों की माफी मिलती है। उन्...
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