बगहा, मार्च 9 -- ठकराहा प्रखंड के लोगों के लिए कृषि के बाद जीवकोपार्जन का दूसरा विकल्प पशुपालन ही है। दुग्ध उत्पादन से पशुपालकों को दैनिक आय की उम्मीद होती है। लिहाजा गांवों में किसान पशुपालन पर जोर दे रहे हैं। लेकिन दुग्ध संग्रहण केंद्र और संगठित बाजार की व्यवस्था नहीं होने से श्वेत क्रांति जैसे शब्द सियासी और विभागीय फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। इससे ठकराहा समेत बगहा पुलिस जिले में दुग्ध व्यवसाय पशुपालकों के लिए परेशानी का व्यवसाय साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि पशुपालकों को दूध की आधी कीमत मिल रही है। बाजार में 60 रुपये प्रति लीटर दूध बिक रहा है। लेकिन पशुपालकों को आज भी इसकी कीमत मात्र 25 से 30 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। उपर से ठकराहा प्रखंड समेत बगहा पुलिस जिले में पशुपालक रोज पर्याप्त मात्रा में दूध का उत्पादन कर रहे हैं। इसके बा...