किशनगंज, अप्रैल 17 -- किशनगंज, हिन्दुस्तान टीम। खेती-किसानी में दिन-प्रतिदिन चुनौती बढ़ती जा रही है। जलवायु परिवर्तन के दौर में मौसम की अनिश्चितता बढ़ी है। बाढ़, सुखाड़, ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान बढ़ता जा रहा है। दूसरी तरफ खेती कार्य में पहले की तुलना लागत बढ़ गई है। खाद-बीज के दाम बढ़े हैं। मौसम में बदलाव से पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ रही है। मजदूरों की कमी से रोपनी, निकाई-गुड़ाई महंगी होती जा रही है। किसानों के पास संसाधन का अभाव है। उन्हें किराए पर कृषि उपकरण लेकर खेती करनी पड़ रही है। कर्ज लेकर खाद-बीज खरीदना पड़ रहा है। उसके बाद भी तैयार फसल को बेचने में पापड़ बेलने पड़ते हैं। यह भी पढ़ें- दुष्प्रभाव: बढ़ती लागत और बदलते मौसम से खेती पर संकट छाया धान-गेहूं, मक्का से लेकर दलहन-तेलहन, सब्जी मंडी में बिचौलिए हावी हैं। कर्ज चुकाने के लिए किसान ...
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