नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना को केंद्र सरकार द्वारा चुपचाप लागू किए जाने पर असंतोष जताया। शीर्ष अदालत ने इसे 'पीड़ित मुआवजा (अंतरिम राहत) योजना 2026' को बिना घोषणा के लागू किया गया कानून करार दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि अगर आम जनता को किसी कल्याणकारी कानून के बारे में पता ही न हो, तो ऐसे कानून का कोई मतलब नहीं रह जाता। शीर्ष अदालत ने कहा 'यह बिना घोषणा के लागू किया गया कानून है। लोगों को इसके बारे में पता होना चाहिए क्योंकि यह उनके फायदे के लिए बनाया गया है। यह भी पढ़ें- हाईकोर्ट के पास सड़क पार करने के लिए समस्या का समाधान हो, नहीं तो जज वहीं आकर धरना देंगे- सुप्रीम कोर्ट आम आदमी को तो इसका पता ही नहीं चलेगा। ...