वाराणसी, मार्च 16 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मेहनत मजदूरी करके पेट पालने के लिए झारखंड के 48 आदिवासी ठेकेदार की ज्यादती का शिकार होकर रविवार की शाम सड़क पर आने को विवश हो गए। झारखंड के गढ़वा गांव से आदिवासी संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रहे निर्माण कार्य में मजदूरी करने आए हैं।इस दल में 30 वयस्क सदस्यों के अलावा 18 बच्चे हैं। बच्चों की उम्र छह महीने से 10 साल के बीच है। दल के मेठ कैर घासी ने बताया कि अंसारी नाम के व्यक्ति के बुलावे पर वह 15 दिन पहले यहां पहुंचे। गढ़वा गांव से सभी 48 लोगों को बनारस लाने के लिए 20 हजार रुपये अपने पास से खर्च किए। यहां काम शुरू करने के बाद अंसारी नामक व्यक्ति ने सभी मजदूरों को पांच-पांच सौ रुपये दिए। ये आदिवासी दिनभर मजदूरी करते और रात में परिसर में ही तंबू लगाकर रहते। रविवार की शाम अंसारी ने बिना मजदूरी का...