अलीगढ़, दिसम्बर 10 -- (सवालों में अस्पताल) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। बोर्ड पर 'मेडिकल स्टोर' और अंदर पर्दे के पीछे टपकती ड्रिप, टेबल पर खुली सिरिंज और रजिस्ट्रेशन की जगह लावारिस पर्चियों का पुलिंदा, यही नए जमाने की बिन-पंजीकरण 'क्लिनिक संस्कृति' है। शहर में महेंद्र नगर, भदेसी रोड, पला रोड, खैर रोड हो या देहात की हर पटरी, इलाज अब काउंटर वाली दुनिया में बिक रहा है। यहां दवा भी वही देता है, नुस्खा भी वही लिखता है और गंभीर मरीजों पर कमीशन की दर भी वही तय करता है। मेडिकल की तख्ती जितनी मासूम, अंदर उतना ही तैयार अस्पताल, बिना लाइसेंस, बिना योग्यता और बिना शर्म। शहर के वे मोहल्ले, जहां पहले सिर्फ दवाओं की दुकानें थीं, अब मिनी अस्पतालों के रूप में खड़ी हैं। महेंद्र नगर, भदेसी रोड, पला रोड, जयगंज, जीवनगढ़ और खैर रोड पर कतार में लगे मेडिकल स्टोर थर्...
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