सीवान, मई 15 -- सोने की खरीद-बिक्री बंद होने से सर्राफा दुकानों का मासिक खर्च निकालना भी कारोबारियों के लिए मुश्किल हो जाएगा। शहर के अर्चना ज्वेलर्स के संचालक रुपेश कुमार ने बताया कि जब खरीद-बिक्री ही नहीं होगी तो दुकान के रखरखाव, बिजली बिल, ऋण और कर्मचारियों का वेतन देने के लिए पैसे कहां से आएंगे। कारोबार प्रभावित होने पर कर्मचारियों और कारीगरों की छंटनी मजबूरी हो जाएगी, जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी। सोने की खरीद-बिक्री से ही आमदनी होती है। मध्यम दर्जे की एक सर्राफा दुकान में प्रतिमाह 70-80 हजार रुपए तक खर्च आता है। मासिक आमदनी का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा इसी में खर्च हो जाता है। यह भी पढ़ें- जंग की तपिश: सोने-चांदी के शोरूमों पर स्टाफ की छंटनी की तलवार ऐसे में जब आमदनी ही नहीं होगी तो दुकान खोलना तक मुश्किल हो जाएगा। जिस दिन सर्राफा दुकान खुलती...