बागेश्वर, जनवरी 16 -- दीवान कनवाल और अरुण ढौंडियाल की जुगलबंदी ने उत्तरायणी मेले में चार चांद लगा दिए। द्वि दिन का ड्यार शेरुवा य दूनी में. न त्यार न म्यार शेरुवा य दूनी में गीत से उन्होंने कार्यक्रम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक गीत सुनाकर समा बांध दिया। लोगों की फरमाइश भी पूरी की। शेर सिंह बिष्ट अनपढ़ की रचना को भी मूर्त रूप देने का काम इन्होंने किया। नुमाईशखेत में रंगमंच पर शुक्रवार अपराह्न ढाई बजे उनका कार्यक्रम शुरू हुआ। जैसे ही जोड़ी मंच पर पहुंची लो द्वि दिन का ड़्यार शेरुवा य दूनी में गीत की मांग करने लगे। उन्होंने इसी गीत से कार्यक्रम शुरू किया। इसके बाद घर छूटो, मुकुल छूटल, हम पहाड़ पंछी छन जाणि कां कां उडुल, बिंदी घाघरी काई, धोती लाल किनार वाई, लस्क कमर बांधा हिम्मत का साथा, खड्युड़ी कौ छै तू, अघिलै मुच्छाय जलि पछ...
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