रांची, अप्रैल 17 -- रांची, वरीय संवाददाता। गिरिडीह के पारसनाथ धर्मसभा में रांची के जैन श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शुक्रवार को मुनि श्री 108 प्रमाण सागर ने प्रवचन में नव दीक्षार्थियों से कहा कि दीक्षा केवल बाहरी वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और जीवन की दिशा बदलने का महान संकल्प है। संयम का मार्ग त्याग, तप और आत्मानुशासन का पथ है। जिस पर चलकर मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। यह संदेश आज सम्मेद शिखर क्षेत्र में आयोजित सभा में भी प्रतिध्वनित हुआ। उन्होंने नव दीक्षार्थियों से कहा कि संसार के मोह, माया और आकर्षणों से ऊपर उठकर धर्ममार्ग अपनाना अत्यंत साहस और आत्मबल का कार्य है। उन्होंने आत्म जागरण का संदेश देते हुए कहा कि समय तेजी से निकल रहा है। यदि अभी नहीं संभले तो यह अनमोल अवसर हाथ से निकल जाएगा। मुनि श्री ने कहा कि जीवित रहत...