नई दिल्ली, अप्रैल 22 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जेलों में बंद दिव्यांग कैदियों के अधिकारों को इस तरह से लागू किया जाना चाहिए जो एक 'मानवीय और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण' के अनुरूप हो। शीर्ष अदालत ने कहा कि देशभर के जेलों में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कारावास संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक सुरक्षा उपायों को कमजोर या सीमित न करे। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह भी कहा है कि जेलों में दिव्यांग कैदियों के अधिकारों को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने दिव्यांग कैदियों से जुड़े कुछ मुद्दों और समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए मामले को सुहास चकमा मामले में गठित उच्चस्तरीय समिति (एचपीसी) को सौंप दिया। पीठ ने मौजूदा याचिका में उठाए गए मुद्दों, जैसे कि दिव्यांग कैदियों के लिए सहायक...
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