नई दिल्ली, अप्रैल 23 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि दिव्यांग व्यक्तियों को पूर्ण सहयोग देने पर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत कोई कानूनी रोक नहीं है। उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम न बनने का हवाला देकर वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल रोका नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिनके 78 वर्षीय पति गंभीर बीमारियों जैसे डिमेंशिया व अल्जाइमर से पीड़ित हैं और पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं। इस मामले में साकेत अदालत के प्रिंसिपल जिला एवं सेशन जज द्वारा यह शर्त रखी गई कि मेडिकल रिपोर्ट केवल इहबास संस्थान से ही ली जाए। यह भी पढ़ें- ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, वैशाखी के लिए आवेदन करें दिव्यांगजन मरीज को शारीरिक रूप से पेश किय...
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