लखनऊ, अगस्त 1 -- जन्मजात या गंभीर एओर्टिक वाल्व रोग से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए रॉस ऑपरेशन नई उम्मीद बनकर सामने आया है। इस तकनीक में मरीज के खराब वाल्व को हटाकर उसकी जगह उसी का स्वस्थ पल्मोनरी वाल्व लगाया जाता है। इससे मरीज का अपना वाल्व काम करता है। लंबे समय में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। आधुनिक सर्जरी तकनीकों और प्रशिक्षित सर्जनों की मदद से ऐसे मरीजों का इलाज अब पहले से अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो रहा है। शनिवार को पीजीआई के कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरेसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग के 39वें स्थापना दिवस समारोह मना। विभागाध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल ने कहा कि कुछ मरीजों में वॉल्व खराब होने के साथ दिल की मुख्य रक्त वाहिका (एओर्टा) का हिस्सा भी छोटा या क्षतिग्रस्त होता है। ऐसे मरीजों का इलाज सामान्य सर्जरी से संभव नहीं होता। यह भी...