नई दिल्ली, जनवरी 3 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनवाई अदालतों में बार-बार व बिना ठोस कारण के स्थगन मांगे जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उच्च न्यायालय ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि समय के साथ एक ऐसी संस्कृति विकसित हो गई है, जिसमें यह गलत अपेक्षा बन गई कि किसी भी मामले में केवल मांग करने पर ही स्थगन मिल जाएगा। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें आशा है कि भविष्य में अदालतों में स्थगन मांगने की यह प्रवृत्ति बदलेगी। पीठ कहा कि स्थगन इस तरह मांगे जा रहे हैं, जैसे यह एक स्वाभाविक अधिकार हो। जबकि इसका अन्य वकीलों व न्यायालय के समय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। न्यायालय ने यह टिप्पणी धीरज अरोड़ा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। ...