नई दिल्ली, नवम्बर 17 -- मनु जोसेफ,पत्रकार और उपन्यासकार वे अंग्रेजी में तख्तियां लिए खड़े थे। उनके गंभीर चेहरे पर नाराजगी साफ-साफ देखी जा सकती थी। यह उस विरोध-प्रदर्शन का दृश्य था, जो दिल्ली के संपन्न तबकों के लोग वायु प्रदूषण के खिलाफ कर रहे थे। यह अभूतपूर्व तो नहीं था, लेकिन सामान्य भी नहीं था। राष्ट्रीय राजधानी ही नहीं, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में भी उच्च वर्गों ने सरकार से बेहतर जीवन की सार्वजनिक मांग की है। उनके विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला यूं बढ़ना अच्छी खबर है, फिर चाहे उनकी आवाज बेशक अभी कम है और चिंताएं भी ऐसी नहीं हैं, जिनसे राजनेताओं की पेशानी पर बल पड़े। अभी ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी एक बड़ी वजह बदलता अमेरिका है। दरअसल, भारत का शहरी उच्च-मध्यवर्ग अब तक अपने ही देश में पर्यटकों जैसा व्यवहार करता रहा है। मगर अब उसे लग रहा ...
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