नई दिल्ली, मई 22 -- नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क में व्यापक बदलाव करते हुए नई शुल्क व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य शुल्क प्रणाली को सरल, पारदर्शी और राहतकारी बनाना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अब शुल्क पूरे परिसर के आधार पर नहीं बल्कि वास्तविक जल आवश्यकता के अनुसार तय किया जाएगा। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज केवल नए निर्माण या अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण की स्थिति में यदि जल आवश्यकता नहीं बढ़ती है तो दोबारा शुल्क नहीं लिया जाएगा।धार्मिक संस्थानों और ZLD सिस्टम को छूट नई नीति के तहत आयकर अधिनियम की धारा 12AB के तहत पंजीकृत संस्थानों और धार्मिक स्थलों को 50% अतिरिक्त छूट दी जाएगी। इसके अलावा जिन संस्थागत और व्य...