नई दिल्ली, मई 31 -- नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता राजधानी दिल्ली में शनिवार को साकेत इलाके में एक पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के बुनियादी ढांचे और अवैध निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध निर्माण रोकने की एजेंसियों व प्रशासनिक दावों की तमाम कोशिशों के बावजूद राजधानी में ''ताश के पत्तों'' की तरह ढहती इमारतें कई मासूम लोगों के लिए काल साबित हो रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो व फायर सर्विस के पिछले पांच वर्षों के आंकड़े डराने वाले हैं। अनुमान के मुताबिक दिल्ली में हर साल औसतन करीब औसतन सौ ज्यादा घटनाएं इमारत गिरने, दीवार गिरने या फिर इमारत का कुछ हिस्सा गिरने की दर्ज होती हैं। इनमें मौत व घायल होने वालों की संख्या काफी ज्यादा होती है। यह भी पढ़ें- दिल्ली में 5 मंजिला बिल्डिंग गिरने से 4 लोगों की मौत, मल...