नई दिल्ली, अप्रैल 17 -- उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी इलाके में 2 फरवरी 2018 की रात तीन परिवारों के लिए किसी कयामत से कम नहीं थी। एक भीषण सड़क हादसे में एक ही बाइक पर सवार रवि कुमार, सतीश कुमार और रोहित की असमय मौत हो गई। मृतकों के परिजनों ने न्याय और मुआवजे की उम्मीद में 'मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण' (एमएसीटी) का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 8 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जो फैसला आया, उसने उन्हें झकझोर कर रख दिया। दिल्ली पुलिस की लापरवाही और कथित 'फर्जी' जांच के कारण न्यायाधिकरण ने मुआवजे की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। पुलिस की एक गलत जांच ने न केवल कानूनी प्रक्रिया को गुमराह किया, बल्कि उन बेसहारा परिवारों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया, जो 8 सालों से न्याय की बाट जोह रहे थे। यह भी पढ़ें- जाली साइन कर कोर्ट में लगाई थी चार्जशीट, दिल्ली प...